‘छतरीवाली’ पर रकुल : उन मुद्दों को उठाया जिन पर हम आमतौर पर बात नहीं करते

Rakul Preet Singh: रकुल प्रीत ने कहा – “मैं ‘छतरीवाली’ को दर्शकों से मिल रही अद्भुत प्रतिक्रिया से अभिभूत हूं यह मेरे लिए एक बेहद खास फिल्म है और मैं दर्शकों की आभारी हूं.”

Rakul Preet: 

अभिनेत्री रकुल प्रीत (फोटो)

Rakul Preet:  अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘छतरीवाली’ को मिल रही प्रतिक्रिया से खुश हैं. उन्होंने कहा कि फिल्म के जरिए उन्हें उन मुद्दों को उठाने का मौका मिला है जिन पर आमतौर पर बात नहीं की जाती है रकुल फिल्म में एक गुणवत्ता नियंत्रण प्रमुख की भूमिका निभा रही है जो समाज को बदलने और युवा दिमाग को शिक्षित करने के मिशन पर जाता है. रकुल को फिल्म में उनके संवेदनशील चित्रण के लिए सराहा गया है.

रकुल प्रीत ने कहा – “मैं ‘छतरीवाली’ को दर्शकों से मिल रही अद्भुत प्रतिक्रिया से अभिभूत हूं यह मेरे लिए एक बेहद खास फिल्म है और मैं दर्शकों की आभारी हूं.”

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“इस फिल्म के साथ – मुझे मुद्दों को संबोधित करने और उन पहलुओं पर प्रकाश डालने का मौका मिला जिनके बारे में हम आमतौर पर बात नहीं करते जिस तरह से दर्शक विषय को ग्रहण कर रहे हैं मुझे वह पसंद आया मुझे खुशी है कि हमारा संदेश दर्शकों तक अच्छी तरह से पहुंचा है.”फिल्म गर्भ निरोधकों और सुरक्षित यौन संबंध के बारे में बात करती है. रॉनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित और तेजस प्रभा विजय देओस्कर द्वारा निर्देशित ‘छतरीवाली’ में रकुल और सुमीत व्यास हैं. इसे 20 जनवरी को जी5 पर रिलीज किया गया था.

कई जगहों पर कहानी पड़ी कमजोर

संचित गुप्ता और प्रियदर्शी श्रीवास्तव ने फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद लिखे हैं। कहानी कई जगहों पर कमजोर पड़ती है। बिना वजह के कई दृश्य भी ठूंसे गए हैं, जैसे मेडिकल स्टोर वाले का कंडोम को घटिया, अश्लील चीज कहकर करनाल के पुरुषों को उनकी पत्नियों के विरुद्ध भड़काने वाला प्रसंग, सान्या का स्कूल के बाहर बैठकर यौन शिक्षा देने और जेल जाने वाला दृश्य, उसकी मां का जुआ खेलना यह केवल फिल्म को भटकाते हैं।

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रकुल प्रीत सिंह के कंधों पर टिकी फिल्म

रकुल प्रीत सिंह के कंधों पर फिल्म का दारोमदार है. कॉमेडी सीन को वह आसानी से संभाल लेती हैं, लेकिन गंभीर दृश्यों में कई बार वह प्रभाव नहीं छोड़ पाती हैं. सतीश कौशिक और राजेश तैलंग अपनी भूमिकाओं में जंचे हैं सुमीत व्यास, प्राची शाह ने सीमित दायरों में रहकर अच्छा काम किया है. वरिष्ठ कलाकार डॉली अहलूवालिया की प्रतिभा का समुचित प्रयोग नहीं किया गया है. फिल्म का कोई गाना ऐसा नहीं, जो फिल्म खत्म होने पर याद रहे.

-भारत एक्सप्रेस

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