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भारत की इस नदी में पानी के साथ बहता है सोना, निकालने वालों की लगी रहती है भीड़, वैज्ञानिक भी नहीं पता कर पा रहे सच्चाई

दुनिया रहस्यों से भरी हुई है. जिसके बारे में आज तक न तो विज्ञान सच्चाई का पता लगा पाया और ना ही इस रहस्य से कभी पर्दा उठने की उम्मीद है.

सांकेतिक फोटो

दुनिया रहस्यों से भरी हुई है. जिसके बारे में आज तक न तो विज्ञान सच्चाई का पता लगा पाया और ना ही इस रहस्य से कभी पर्दा उठने की उम्मीद है. महिलाओं की सबसे ज्यादा प्रिय चीज सोना होता है. सोने के गहने उनके लिए बहुत मायने रखते हैं. इसके अलावा ये मंहगी धातुओं में भी शुमार है, लेकिन अगर आपसे कोई कहे कि भारत की एक ऐसी भी नदी है जिसमें सोना बहता है, तो आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे, लेकिन ये सच है. जिसके बारे में आज तक कोई भी नहीं जान पाया कि आखिर ये सोना पानी के साथ कहां से आ रहा है? इस नदी के किनारे लोग 24 घंटे मोजूद रहते हैं और सोना बीनते हुए दिखाई देते हैं. तो आइये आज आपको बताते हैं कि वो कौन सी नदी जिसमें पानी की धारा के साथ सोना भी बहता है और ये किस राज्य में है. जिसे सोने की नदी भी कहा जाता है.

झारखंड में बहती है स्वर्ण रेखा नदी

दरअसल, भारत की जिस नदी में पानी के साथ सोना बहता है वो झारखंड राज्य में बहती है. नदी में सोना पाए जाने की वजह से इसे स्वर्ण रेखा नाम से जाना जाता है. स्वर्ण रेखा नदी का उद्गम स्थल झारखंड की राजधानी रांची से करीब 16 किलोमीटर दूर है. स्वर्ण रेखा नदी झारखंड से निकलकर पश्चिम बंगाल और फिर ओडिशा तक पहुंचती है. स्वर्ण रेखा की सहायक नदी करकरी में भी सोने के कण पाए जाए जाते हैं. नदी की कुल लंबाई 474 किलोमीटर है. नदी के आस-पास रहने वाले लोग बताते हैं कि नदी में सदियों से सोना बह रहा है. ये कहां से आता है इसके बारे में किसी कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं है.

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वैज्ञानिक भी नहीं पता कर पाए सच्चाई

सदियों से स्वर्ण रेखा नदी में पानी के साथ सोना बह रहा है, लेकिन वैज्ञानिक अभी तक ये पता नहीं लगा पाए हैं कि ये सोना आखिर कहां से आ रहा है? वहीं इसको लेकर वैज्ञानिकों का मत भी अलग-अलग है. कुछ भू-गर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि नदी में बहने वाला पानी तमाम चट्टानों और ऐसे रास्तों से गुजरता है जहां पर कभी सोने की खदानें रही होंगी, जिससे पानी में उनके कण मिल जाते हैं और बहते हुए आते हैं.

नदी से सोना निकालना काफी कठिन

हालांकि नदी में सोना बहता जरूर है, लेकिन इसे पानी से निकालना इतना आसान नहीं होता है. नदी के किनारे तमाम ऐसे  समुदाय हैं जो कई वर्षों से इसी के किनारे रहते हैं. ये लोग नदी में बहने वाले सोने को पानी से छानकर उनके कणों को इकट्ठा करते हैं और फिर उन्हें बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं. तमाड़ और सारंडा जैसे इलाके ऐसे हैं जहां पुरुष, महिलाएं और बच्चे सुबह उठकर नदी से सोना इकट्ठा करने जाते हैं. इस नदी के आसपास जाने पर जगह-जगह सूप लिए खड़ी महिलाएं दिख जाएंगी.

-भारत एक्सप्रेस



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