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Gorakhpur: पूर्वांचल के कद्दावर नेता पंडित हरिशंकर तिवारी को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी सैकड़ों की भीड़, पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर तिवारी ने भी दी श्रद्धांजलि

गोरखपुर में आज पूर्वांचल की राजनीति के पंडित माने जाने वाले हरिशंकर तिवारी की शवयात्रा निकलेगी और अंतिम संस्कार मुक्तिधाम में होगा.

अंतिम यात्रा मे उमड़ी भीड़

Edited by Nitish Pandey

Gorakhpur: पूर्वांचल के कद्दावर नेता व यहां की राजनीति के पंडित माने जाने वाले पंडित हरिशंकर तिवारी की अंतिम विदाई में सैकड़ों का जन सैलाब उमड़ा है. पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मा शंकर तिवारी ने भी उनको श्रद्धांजलि की है तो वहीं उनके पैतृक गांव चिल्लू पार स्थित टाडा में भी उनके अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई है. वहीं निधन के बाद से ही गोरखपुर के तिवारी हाता पर उनके समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा है. सभी लोग उनकी एक झलक देखने के लिए बेताब दिखाई दे रहे हैं. तो वहीं खबर सामने आ रही है कि अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव से मुक्तिधाम से लिए निकलेगी. तिवारी हाता से अंतिम यात्रा टड़वा जाने के लिए निकल चुकी है.

गोरखपुर में यूपी सरकार ने 5 बार कैबिनेट मंत्री रहे पंडित हरिशंकर तिवारी का मंगलवार की शाम को धर्मशाला स्थित आवास पर उनका निधन हो गया था. वह करीब 2 साल से बीमार चल रहे थे आज सुबह उनके धर्मशाला स्थित हाता आवास से उनका पार्थिक शरीर बड़हलगंज स्थित मुक्तिधाम के लिए निकला, लेकिन इसस पहले उनका शव टाडा जाएगा और यहां पर नेशनल पीजी डिग्री कॉलेज में समर्थकों और दर्शनार्थियों के दर्शन हेतु शव को रखा जाएगा. उसके बाद यहां से मुक्तिधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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बता दें कि वह इसी इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी रहे हैं. इसीलिए यहां पर ये जानकारी होने के बाद कि उनकी शव यात्रा तिवारी हाता से निकल कर टाडा आ रही है तो अभी से भीड़ जुटने लगी है. पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के परिवार में दो बेटे पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के अलावा एक बेटी है. बता दें कि पंडित हरिशंकर तिवारी की राजनीति की शुरुआत सन 1985 से हुई जब वह पहली बार चिल्लूपार विधानसभा से विधायक चुने गए. तीन बार कांग्रेस पार्टी से विधायक रहने के बाद उन्होंने अपनी भी एक पार्टी बनाई थी. वह गोरखपुर के बाहुबली नेता थे और उनको पूर्वांचल की राजनीति का पंडित कहा जाता था. कहते हैं कि उन्होंने गोरखपुर की राजनीति मे बुलेट और बैलेट दोनों पर धाक जमाई थी और सरकारें चलाईं थी.

-भारत एक्सप्रेस



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