Salkhan Fossils Park: सोनभद्र में है सबसे पुराना फॉसिल्स पार्क, 150 करोड़ साल पुराना है इस अमूल्य धरोहर का इतिहास

Salkhan Fossils Park: कनाडा के भूवैज्ञानिक एचजे हाफमैन इन जीवाश्म को देखकर काफी प्रभावित हुए थे और उन्होंने कहा था कि इससे खूबसूरत और स्पष्ट जीवाश्म कहीं और नहीं है.

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सलखन फॉसिल्स पार्क

Salkhan Fossils Park: धरती पर ऐसे बहुत से रहस्य हैं जिनके बारे में धीरे-धीरे जानकारियां सामने आ रही हैं. ऐसी कई चीजों को लेकर वैज्ञानिकों का रिसर्च जारी है और उन रहस्यमयी चीजों के रहस्य से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है. ऐसे ही रहस्य उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के सलखन गांव में 50-100 नहीं, बल्कि करीब 150 करोड़ सालों से छिपा था, जिसके सामने आने के बाद अब दावा किया जा रहा है कि 25 हेक्टेयर में फैला ये फासिल्स पार्क दुनिया में अमेरिका के यलो स्टोन पार्क से भी बड़ा है. इस अनमोल धरोहर को कई वैज्ञानिक प्रमाणित कर चुके हैं.

सलखन जीवाश्म पार्क बेहद महत्वपूर्ण स्थान है जहां जाकर जैविक इतिहास की कई पहेलियां सुलझाई जा सकती हैं. जीवन के सृजन की शुरुआत के गवाह बने इन जीवाश्म ने इस तथ्य पर अपनी मुहर लगाई है, जहां करीब 150 करोड़ साल पहले समुद्र की लहरों का राज था. जानकारी के मुताबिक, सोनभद्र के सलखन जीवाश्म पार्क में एलगल स्ट्रोमैटोलाइट्स प्रकार के जीवाश्म पाए जाते हैं जो धरती पर पाए जाने वाले प्राचीनतम जीवाश्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस लिहाज ये भारत ही नहीं बल्कि, दुनिया के लिए अमूल्य धरोहर हैं.

जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने की थी खोज

सोनभद्र जिले के करीब 15 किमी दूर वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग पर स्थित सलखन गांव में यह जीवाश्म है. करोड़ों साल पुराने इस जीवाश्म की खोज सबसे पहले 1933 में जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा की गई थी. इसके लंबे समय बाद, साल 2002 में 50 देशो के भू वैज्ञनिक सलखन गांव स्थित फॉसिल्स पार्क पहुंचे थे. उन्होंने इसे दुनिया का सबसे पुराना फासिल्स पार्क बताया था.

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लगभग 1 मीटर ऊंची छल्ले जैसी आकृतियों वाली रचनाएं

तब कनाडा के भूवैज्ञानिक एचजे हाफमैन इन जीवाश्मों को देखकर काफी प्रभावित हुए थे और उन्होंने कहा था कि इससे खूबसूरत और स्पष्ट जीवाश्म कहीं और नहीं है. अमेरिका की दो महिला वैज्ञानिकों ने भी माना कि ये जीवाश्म करीब 150 करोड़ साल पुराना हैं. जानकारी के मुताबिक, सलखन में लाम स्टोन स्तम्भ एवं दुर्गम दृश्य हैं, जिसके ऊपरी सतह पर अंकित छल्ले जैसी आकृतियों वाली लगभग 1 मीटर ऊंची रचनाएं डेढ़ अरब वर्ष पुराने जीवन का प्रमाण हैं. स्थानीय लोग इन जीवाश्म को पत्थर के फूल और पेड़ कहते हैं.

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