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Ghosi Bypoll: सपा के लिए चुनौती बन रहे भाजपा के रणनीतिकार, माफियाराज और भ्रष्टाचार की दिला रहे याद

यूपी सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और बृजेश पाठक लगातार संवाद कार्यक्रम में जा रहे हैं और क़ानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, योजनाएं और आर्थिक विकास की बात कर रहे हैं.

केशव प्रसाद मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य

Rakesh Kumar Edited by Rakesh Kumar
Ghosi Bypoll: घोसी विधानसभा उप चुनाव अब दिलचस्प मोड़ ले चूका है. भाजपा और सपा की सीधी जंग में प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी हुई है. भाजपा 2022 विधानसभा चुनाव में हार चुकी अपनी सीट को फिर पाना चाहती है वहीं सपा के सामने सीट बचाने की चुनौती है. भाजपा ने उप चुनाव में पुरी ताकत झोंक दी है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की रणनीति और एक कार्यकर्ता के रूप में उतरे सरकार के मंत्री अपने प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को जिताने में लगे हैं. भाजपा संगठन और सरकार हर वर्ग के पास जा रही और संवाद भी कर रही है. सरकार के मंत्री और संगठन के पदाधिकारी दलित और पिछड़ों के पास जाकर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं और यह भी बता रहे हैं कि विकास के लिए सिर्फ भाजपा ही क्यों जरुरी है.

यूपी सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और बृजेश पाठक लगातार संवाद कार्यक्रम में जा रहे हैं और क़ानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, योजनाएं और आर्थिक विकास की बात कर रहे हैं. वह यह भी बता रहे हैं कि सपा के शासनकाल में विकास क्यों नहीं हुआ. इस उप चुनाव में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मोर्चा संभाल रहे हैं. भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत हर वर्ग के पास जाने और उस जाति के मंत्री को जिम्मेदारी भी दी कि वह भाजपा के विचारधारा और नीतियों को बताएं. यही वजह है कि 24 से अधिक मंत्री और 60 से अधिक पदाधिकारियों को लगाया गया है. मंत्री और पदाधिकारी यह भी बता रहे हैं कि सपा के प्रभाव वाली सीट पर जहां भी भाजपा जीती है वहां क्या बदलाव हुए हैं. घोसी विधानसभा की बात करें तो यहां साढ़े चार लाख से अधिक मतदाता हैं, इसमें मुस्लिम और दलित निर्णायक भूमिका में हैं.

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90 हजार से अधिक मुसलमान जीत हार में भूमिका निभाते हैं. मुस्लिम मतदाताओं के बीच जाने और भाजपा क्यों जरुरी है उसको समझाने के लिए मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी को जिम्मेदारी दी गई है. भाजपा पसमंदा मुसलमानों को साथ लाने में जुटी है. वहीं 70 हजार से अधिक दलित, 60 हजार यादव और 52 हजार राजभर की भी मुख्य भूमिका होती है साथ ही क्षत्रिय, ब्राह्मण, भूमिहार और अन्य की संख्या 10-10 हजार के आसपास है. घोसी विधानसभा का अस्तित्व 1957 में बना और भाजपा यहां से चार बार जीत चुकी है वहीं समाजवादी पार्टी दो बार जीत हासिल कर चुकी है.

-भारत एक्सप्रेस



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